क्या वसीयत में पासवर्ड लिखने चाहिए?
जब ऑनलाइन अकाउंट के भविष्य की योजना शुरू होती है, तो पासवर्ड के लिए वसीयत सबसे स्वाभाविक जगह लगती है। लेकिन क़ानून के जानकार लगभग एक सुर में कहते हैं: ऐसा न करें। यहाँ बताया गया है कि क्यों, वसीयत में आपकी डिजिटल ज़िंदगी के बारे में इसके बजाय क्या लिखें, और खुद पासवर्ड कहाँ होने चाहिए।
कारण 1: वसीयत सार्वजनिक हो सकती है
जीवित रहते वसीयत निजी रहती है, लेकिन मृत्यु के बाद यह बदल सकता है:
- इंग्लैंड और वेल्स: प्रोबेट मिलने के बाद वसीयत प्रोबेट रिकॉर्ड का हिस्सा बन जाती है। कोई भी सरकारी खोज सेवा से 16 पाउंड में इसकी कॉपी ऑनलाइन मँगा सकता है।
- अमेरिका: प्रोबेट कोर्ट में दाखिल वसीयत आम तौर पर सार्वजनिक अदालती रिकॉर्ड बन जाती है, हालाँकि नियम और समय हर राज्य में अलग होते हैं।
वसीयत में लिखी हर बात, पासवर्ड समेत, ऐसे लोग भी पढ़ सकते हैं जिन्हें इसे कभी नहीं देखना चाहिए था।
कारण 2: पासवर्ड बदलते हैं, वसीयत नहीं
वसीयत पढ़े जाने से पहले शायद दर्जनों पासवर्ड बदल चुके होंगे। वसीयत अपडेट करने का मतलब है नई वसीयत या तय औपचारिकताओं के साथ आधिकारिक संशोधन। वसीयत में लिखे पासवर्ड, जब किसी को उनकी ज़रूरत पड़ेगी, लगभग तय है कि पुराने हो चुके होंगे।
कारण 3: वसीयत बहुत देर से पढ़ी जाती है
परिवार को कुछ ही दिनों में एक्सेस की ज़रूरत पड़ सकती है: दस्तावेज़ ढूँढने, सब्सक्रिप्शन बंद करने या लोगों को ख़बर देने के लिए। वसीयत अक्सर अंतिम संस्कार के बाद पढ़ी जाती है, और संपत्ति से जुड़ी प्रक्रिया में महीनों लग सकते हैं।
कारण 4: पासवर्ड अनुमति नहीं है
सही पासवर्ड होने पर भी किसी और के नाम से लॉग इन करना सेवा की शर्तों का उल्लंघन हो सकता है। अमेरिका के ज़्यादातर राज्यों में Revised Uniform Fiduciary Access to Digital Assets Act (RUFADAA) नाम का क़ानून साफ़ प्राथमिकता क्रम में तय करता है कि मृत्यु के बाद किसी के अकाउंट तक कौन पहुँच सकता है:
- कंपनी के अपने टूल में की गई सेटिंग्ज़, जैसे Google का निष्क्रिय खाता प्रबंधक या Facebook का लीगेसी संपर्क, सबसे पहले आती हैं।
- वसीयत या किसी दूसरे दस्तावेज़ के निर्देश उसके बाद आते हैं।
- सेवा की शर्तें तब लागू होती हैं जब कोई निर्देश न छोड़ा गया हो।
यानी किसी ऐप में चुनी गई सेटिंग वसीयत में लिखी बात से ऊपर हो सकती है। पक्का करें कि दोनों मेल खाती हों।
इसके बजाय वसीयत में क्या लिखा जा सकता है
- आपके डिजिटल अकाउंट कौन संभालेगा, आम तौर पर संपत्ति का प्रबंधन करने वाला व्यक्ति, शायद तकनीक समझने वाले किसी भरोसेमंद व्यक्ति की मदद से।
- अकाउंट के कंटेंट तक पहुँच की सहमति, जैसे ईमेल और मैसेज। RUFADAA के तहत, इसके बिना संपत्ति का प्रबंधन करने वाला व्यक्ति आम तौर पर आपके मैसेज नहीं देख सकता।
- आपकी इच्छा क्या है हर तरह के अकाउंट के साथ: रखना, डाउनलोड करना, स्मृति अकाउंट बनाना या बंद करना।
- आपके निर्देश और पासवर्ड कहाँ रखे हैं, बिना खुद पासवर्ड लिखे।
पासवर्ड कहाँ रखें
- आपातकालीन एक्सेस वाला पासवर्ड मैनेजर। कुछ, जैसे Bitwarden, किसी भरोसेमंद व्यक्ति को एक्सेस माँगने देते हैं; अगर तय प्रतीक्षा अवधि में मना न किया जाए, तो उसे एक्सेस मिल जाता है।
- प्लैटफ़ॉर्म के अपने टूल: Apple लीगेसी संपर्क, Google निष्क्रिय खाता प्रबंधक और Facebook का लीगेसी संपर्क।
- इच्छाओं का पत्र, जिसे आपका वकील वसीयत के साथ रखता है। यह सार्वजनिक नहीं होता, लेकिन उतना ही नया रहता है जितनी बार इसे दोबारा लिखा गया हो।
- सौंपने के लिए बना एन्क्रिप्टेड वॉल्ट, जिसे आपके चुने हुए लोग सिर्फ़ ज़रूरत पड़ने पर खोल सकते हैं।
जो भी चुनें, दो-चरणीय सत्यापन के बारे में भी सोचें: अगर कोड आपके फ़ोन पर आते हैं, तो किसी के पास फ़ोन अनलॉक करने का तरीका या बैकअप कोड का सेट होना चाहिए।
एक आसान योजना
- अपने ज़रूरी अकाउंट और हर एक के साथ क्या होना चाहिए, इसकी सूची बनाएँ।
- Apple और Google के प्लैटफ़ॉर्म टूल सेट करें।
- पासवर्ड आपातकालीन एक्सेस वाले पासवर्ड मैनेजर या एन्क्रिप्टेड वॉल्ट में रखें।
- अपने वकील से वसीयत में डिजिटल संपत्ति से जुड़ा प्रावधान जुड़वाएँ, जिसमें आपके मैसेज तक पहुँच की सहमति भी हो।
- साल में एक बार सब कुछ दोबारा देखें।
हमारी डिजिटल विरासत चेकलिस्ट आपको कदम-दर-कदम बताती है।
यह गाइड सामान्य जानकारी है, क़ानूनी सलाह नहीं। वसीयत और डिजिटल संपत्ति से जुड़े क़ानून देशों और राज्यों में अलग होते हैं, इसलिए अपने इलाके के क़ानूनी जानकार से सलाह लें।